ज़िन्दगी फूलों की सेज ना सही,
काटों पर चलकर तो देखूं,
ज़िन्दगी बिना रास्ते की सवारी ना सही,
सैर कर के तो देखूं,
ज़िन्दगी बंशी की बयार ना सही,
उसे बजा कर तो देखूं,
ज़िन्दगी प्यार का नाम ना सही,
प्यार कर के तो देखूं,
ज़िन्दगी चेहरों का जाम ना सही,
जाम बनकर तो देखूं,
ज़िन्दगी गमो की हँसी ना सही,
हँसी बनकर तो देखूं,
ज़िन्दगी आँखों का उजाला ना सही,
उजाला फैला के तो देखूं,
ज़िन्दगी तू सच मे ना सही,
सच बना के तो देखूं,
My Lines
This blog is dedicated to all those who love to write..........
मेरे बारे में
- Ashish Tiwari
- Hey this is Ashish. I just love to write these kinda of lines, that's why i am creating this blog. Please enjoy reading and posting....
21 मई 2010
12 मई 2010
दर्द ऐ मोह्हबत, ज़िन्दगी मे एक इबादत,
बस एक इसके सिवा और कुछ भी नही,
सजदा करना अब अपने उस खुदा का,
जिसके लिए मेरे पास अश्क ऐ नियामत के सिवा कुछ भी नही,
कोशिशें नादां ने करके देखीं सारी,
अब उम्मीदों के दरिया मे नूरे खुदा के सिवा कुछ भी नही,
अश्कों के साये मे रहना अच्छा अच्छा लगता है,
इस नाकाम सी ज़िन्दगी से अच्छा इन अश्कों मे डूब जाने के सिवा कुछ भी नही,
दिले आसमां की चादर तो बिछाई प्यार के लिए,
दामन मे मिला चुटकी भर, लिपट जाऊं उतने मे ही इसके सिवा कुछ भी नही,
दर्द ऐ मोह्हबत, ज़िन्दगी मे एक इबादत,
बस एक इसके सिवा और कुछ भी नही,
बस एक इसके सिवा और कुछ भी नही,
सजदा करना अब अपने उस खुदा का,
जिसके लिए मेरे पास अश्क ऐ नियामत के सिवा कुछ भी नही,
कोशिशें नादां ने करके देखीं सारी,
अब उम्मीदों के दरिया मे नूरे खुदा के सिवा कुछ भी नही,
अश्कों के साये मे रहना अच्छा अच्छा लगता है,
इस नाकाम सी ज़िन्दगी से अच्छा इन अश्कों मे डूब जाने के सिवा कुछ भी नही,
दिले आसमां की चादर तो बिछाई प्यार के लिए,
दामन मे मिला चुटकी भर, लिपट जाऊं उतने मे ही इसके सिवा कुछ भी नही,
दर्द ऐ मोह्हबत, ज़िन्दगी मे एक इबादत,
बस एक इसके सिवा और कुछ भी नही,
परेशान रातों मे वो तुम ही तो थे,
उन खयालातों मे वो तुम ही तो थे,
ज़रा मुस्करा दूं, उन बातों मे वो तुम ही तो थे,
कुछ मै कह दूं, उन सवालों मे वो तुम ही थे,
ऐ मेरी ज़िन्दगी जीना जिसने सिखाया, वो तुम ही तो थे,
आंखें करु बंद या खुली, नज़र आये जो, वो तुम ही तो थे,
क्या कहूं इस पल मे, तुम ही हो, उस पल मे वो तुम ही तो थे,
उन खयालातों मे वो तुम ही तो थे,
ज़रा मुस्करा दूं, उन बातों मे वो तुम ही तो थे,
कुछ मै कह दूं, उन सवालों मे वो तुम ही थे,
ऐ मेरी ज़िन्दगी जीना जिसने सिखाया, वो तुम ही तो थे,
आंखें करु बंद या खुली, नज़र आये जो, वो तुम ही तो थे,
क्या कहूं इस पल मे, तुम ही हो, उस पल मे वो तुम ही तो थे,
सारी रैना मै जागा, आँखों मे इंतज़ार था,
कहीं कोई आएगा, दिल को ये ऐतबार था,
यादों मे बस तेरा ही....तेरा ही खुमार था,
बातें उसकी करता रहा बैठ चाँद के साथ मे,
महफ़िल ये भी ख़तम हुई, बातों की उस रात मे,
फिर कभी कर लूँगा आज थोडा इंतज़ार था,
कहीं कोई आएगा दिल को ये इंतज़ार था....
कैसे भूलूँ वो आँखें, कैसे भूलूँ वो हँसी,
दीवाना मै हो गया, बस बेबसी सी रह गयी,
कहाँ मै जाऊं....जाकर ढूँढूं मन के चोर को,
फिर वही रात आई, आँखों मे फिर इंतज़ार था,
आज वो आयेंगे, दिल को ये ऐतबार था,
रात कब की छट चुकी, आँखों में उसका दीदार था.........
कहीं कोई आएगा, दिल को ये ऐतबार था,
यादों मे बस तेरा ही....तेरा ही खुमार था,
बातें उसकी करता रहा बैठ चाँद के साथ मे,
महफ़िल ये भी ख़तम हुई, बातों की उस रात मे,
फिर कभी कर लूँगा आज थोडा इंतज़ार था,
कहीं कोई आएगा दिल को ये इंतज़ार था....
कैसे भूलूँ वो आँखें, कैसे भूलूँ वो हँसी,
दीवाना मै हो गया, बस बेबसी सी रह गयी,
कहाँ मै जाऊं....जाकर ढूँढूं मन के चोर को,
फिर वही रात आई, आँखों मे फिर इंतज़ार था,
आज वो आयेंगे, दिल को ये ऐतबार था,
रात कब की छट चुकी, आँखों में उसका दीदार था.........
ये इश्क ना फरमाए कोई, बड़ा दर्द सा चुभता है,
एक आह सी उठती है, और कुछ धुआ सा उठता है,
अपनों मे हम बेगाने हो जाते हैं, ना जाने कैसे अनजाने हो जाते हैं,
सांसों को बोलूँ कैसे कि रुक जाओ, सांसों मे वो ही रहता है,
न जाने वो कैसी किस्मत लिखता है,
कुछ पल सपनो के देकर उनको ओझल कर देता है,
ये इश्क ना फरमाए कोई, बड़ा दर्द सा चुभता है
एक आह सी उठती है, और कुछ धुआ सा उठता है,
अपनों मे हम बेगाने हो जाते हैं, ना जाने कैसे अनजाने हो जाते हैं,
सांसों को बोलूँ कैसे कि रुक जाओ, सांसों मे वो ही रहता है,
न जाने वो कैसी किस्मत लिखता है,
कुछ पल सपनो के देकर उनको ओझल कर देता है,
ये इश्क ना फरमाए कोई, बड़ा दर्द सा चुभता है
सदस्यता लें
संदेश (Atom)