सारी रैना मै जागा, आँखों मे इंतज़ार था,
कहीं कोई आएगा, दिल को ये ऐतबार था,
यादों मे बस तेरा ही....तेरा ही खुमार था,
बातें उसकी करता रहा बैठ चाँद के साथ मे,
महफ़िल ये भी ख़तम हुई, बातों की उस रात मे,
फिर कभी कर लूँगा आज थोडा इंतज़ार था,
कहीं कोई आएगा दिल को ये इंतज़ार था....
कैसे भूलूँ वो आँखें, कैसे भूलूँ वो हँसी,
दीवाना मै हो गया, बस बेबसी सी रह गयी,
कहाँ मै जाऊं....जाकर ढूँढूं मन के चोर को,
फिर वही रात आई, आँखों मे फिर इंतज़ार था,
आज वो आयेंगे, दिल को ये ऐतबार था,
रात कब की छट चुकी, आँखों में उसका दीदार था.........

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