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Hey this is Ashish. I just love to write these kinda of lines, that's why i am creating this blog. Please enjoy reading and posting....

12 मई 2010

ये इश्क ना फरमाए कोई, बड़ा दर्द सा चुभता है,

एक आह सी उठती है, और कुछ धुआ सा उठता है,

अपनों मे हम बेगाने हो जाते हैं, ना जाने कैसे अनजाने हो जाते हैं,

सांसों को बोलूँ कैसे कि रुक जाओ, सांसों मे वो ही रहता है,

न जाने वो कैसी किस्मत लिखता है,

कुछ पल सपनो के देकर उनको ओझल कर देता है,

ये इश्क ना फरमाए कोई, बड़ा दर्द सा चुभता है

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