दर्द ऐ मोह्हबत, ज़िन्दगी मे एक इबादत,
बस एक इसके सिवा और कुछ भी नही,
सजदा करना अब अपने उस खुदा का,
जिसके लिए मेरे पास अश्क ऐ नियामत के सिवा कुछ भी नही,
कोशिशें नादां ने करके देखीं सारी,
अब उम्मीदों के दरिया मे नूरे खुदा के सिवा कुछ भी नही,
अश्कों के साये मे रहना अच्छा अच्छा लगता है,
इस नाकाम सी ज़िन्दगी से अच्छा इन अश्कों मे डूब जाने के सिवा कुछ भी नही,
दिले आसमां की चादर तो बिछाई प्यार के लिए,
दामन मे मिला चुटकी भर, लिपट जाऊं उतने मे ही इसके सिवा कुछ भी नही,
दर्द ऐ मोह्हबत, ज़िन्दगी मे एक इबादत,
बस एक इसके सिवा और कुछ भी नही,

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