पलों की पलकों मे ना जाने कितने ख्वाब पल जातें हैं,
ये झुकतीं हैं तो ना जाने कितने दिल मचल जाते हैं,
ये उठतीं हैं तो ना जाने कितनो के घर जल जातें हैं,
बस कुछ पलों का कारवां होता है, और ज़िन्दगी मे बस एक धुआं होता है,
क्या पता कल को मिलें न मिलें, पल गुजार लो जो खुशी से मिल जाते हैं,
पल ये कभी खुशियाँ तो कभी आंसू दे जाते हैं,
पल ये कभी दादी- नानी के साथ अंगुलियाँ पकड़ कर चलना सिखाते हैं,
पल ये कभी माँ की गोद मे सोना याद दिलाते हैं,
पल ये कभी पापा की डांट सुनाते हैं, पल ये कभी ज़िन्दगी बदल जाते हैं,
कुछ तुम्हारे पल भी ऐसे होंगे, पलकों पर बैठे तो होंगे,
बस उनको गिरने मत देना तुम, गिरकर ये भी खो जाते हैं,
पलों की पलकों मे ना जाने कितने ख्वाब पल जातें हैं...

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